Wednesday, 24 June 2015

इस क़दर बेज़ार हैं

इस क़दर बेज़ार हैं इंसान से 'जुर्'अत'
ख़ुदाया अब मुझे अगले जनम इंसान मत करना

जानवर कर दे भले ही ख़्वार तू कर दे
गुज़ारिश है मुझे इंसान अब भगवान मत करना

जो माने इल्तिजा मेरी तो इक मामूली चाहत है
शजर कर दे या कर दे फूल, घर गुलदान मत करना

1 comment:

  1. as always, liked it for poetic beauty...but why don't you want to be human again? there are certainly many ugly things about being human, but there are equally great things as well :))