Wednesday, 10 April 2019

साफ़ करते रहते हैं

साफ़ करते रहते हैं
कभी आँगन
कभी आईना
कभी घर का आसमान
रिश्तो'न पे जमी गर्द भी कभी 'वैक्यूम क्लीन' करो न 

रंग इतने चटख हैं आज-कल

रंग इतने चटख हैं आज-कल,
कि बीनाई खतरे में है आज-कल

जो, मैं नहीं हूँ, तो फ़िर क्यों
वोही बनाने पे तुली है दुनिया आज-कल

कब तक यस-सर यस-सर करें
पैर का अंगूठा बहुत याद आ रहा है आज-कल

कहते हैं दुनिया हसीन  ख्व़ाब है दीवाने का
मेरी क्यों 'नाईटमेयर' हुई जाती है आज-कल

'ह्यूमन बोम्ब' नज़र आते हैं सब
जिसे देखो फटने को तैयार है आज-कल

सोने के बाद और नींद आने  से पहले
ज़िन्दगी कितनी बदल गई है आज-कल

बहलाते- बहलाते यहाँ तक आया था
बहलाया जाने लगा हूँ आज-कल

'सर्वाइवल ऑफ़ दी फिट्टेस्ट' कुछ ज्यादा ही हो गया है
ज़िन्दगी की गाडी 'रिज़र्व' में आ गई है आज-कल

'मीटर और नो मीटर' 'आई गिव अ डैम'
ऐसा -सा कुछ हाल है आज-कल

जिए जाने की रस्म भी जारी है


जिए जाने की रस्म भी जारी है
न कोई दर्द है... न साँस भारी है

कहीं कुछ मर-सा गया लगता है
न तो आँख में ही कुछ खारी है

कुछ देर मुझे मेरे हाल पे छोड़ दो
दिल में इक मासूम की याद तारी है

क़र्ज़-दार ऐसा किया है की चुक न सकेगा
मेरे लिए कोई जान दे..!! तो अब मेरी बारी है..??

यक़ीनन, कुछ तो अच्छा किया है मैंने
निगेहबा'न की नज़र 'जुर्रत' पे जारी है




JIYE JAANE KI RASM BHI JAARI HAI
NA KOI DARD HAI.. NA SAANS BHAARI HAI

KAHIN KUCHH MAR-SA GAYA LAGTA HAI
NA TO AANKH MEIN HI KUCHH KHAARI HAI

KUCHH DER MUJHE MERE HAAL PE CHHORH DO
DIL MEIN IK MASOOM KI YAAD TAARI HAI

QARZ-DAAR AISA KIYA HAI KI CHUK NA SAKEGA
MERE LIYE KOI JAAN DE..!! TO AB MERI BAARI HAI..??

YAQEENAN, KUCHH TO ACHHA KIYA HAI MAINE
NIGEHBAA'N KI NAZAR 'JUR'RAT' PE JAARI HAI

Monday, 23 July 2018

सच कहता हूँ

सच कहता हूँ - कहने के लिए कसमें नहीं खाता 
चुप रहता हूँ अक्सर अब कि सच मैं कह नहीं पाता 



Wednesday, 18 July 2018

बारिश भी पक गई है

बारिश भी पक गई है,
आते आते थक गई है .
'एक्चुअली'... ज़मीं के पास
उसको रिझाने की हरियाली बची नहीं है.
आई...
सब पानी-पानी कर दिया,
एक बार.
कपड़े पहने,
और करवट बदल के सो गई .